Download the Sakat Chauth Vrat Katha PDF for free! Immerse in the auspicious tradition with the complete fasting story and rituals guide. सकट चौथ की कहानी PDF Hindi. sakat chauth vrat katha vidhi in hindi.
सकट चौथ, हिन्दू पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा की जाती है और माताएं इसे संतान की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। इसका महत्वपूर्ण पहलु है संतान सुख और उनकी दीर्घायु। इस व्रत का महत्वपूर्ण हिस्सा है गणेशजी की पूजा और उनके अर्चना में विशेष भावना रखना।
व्रत की शुरुआत: सुबह का समय
सकट चौथ का व्रत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बहुत विशेष होता है। इस व्रत को सोमवार, 29 जनवरी 2024 को माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आचार्य निर्णय के साथ रखा जाएगा। इस विशेष दिन चन्द्रोदय समय, यानी रात 09 बजकर 10 बजे को, होगा। इस समय पर चंद्रमा को अर्घ्य देना और व्रत को खोलना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बाद, माघ मास की चतुर्थी तिथि सुबह 06 बजकर 10 मिनट से शुरू होगी और 30 जनवरी को सुबह 08 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी।
सकट चौथ की कथा
एक समय की बात है, किसी नगर में एक कुम्हार रहता था। उसका आंवां नहीं पका और उसने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए राजा से सहायता मांगी। राजा ने राजपंडित से पूछा तो उन्होंने बताया कि हर बार आंवां लगाते समय एक बच्चे की बलि देने की आवश्यकता है। राजा ने यह आदेश दिया कि इस प्रकार बलि चलेगी। इसके बाद, बच्चों में इसकी क्रमशः बारी आई और सभी ने अपने बच्चों को बलि के लिए भेज दिया।
एक दिन बुढ़िया के बच्चे की बारी आई। बुढ़िया थी एकमात्र संतान की माँ और उसका बेटा उसके जीवन का सहारा था। लेकिन राजाज्ञा कुछ नहीं देखना चाहती थी। बुढ़िया ने सोचा, “मेरा एक ही बेटा है, वह भी सकट के दिन मुझसे जुदा हो जाएगा।” इस समय उसे एक उपाय आया। उसने अपने बच्चे को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा दिया और कहा, “भगवान का नाम लेकर आंवां में बैठ जाओ। सकट माता तुम्हारी रक्षा करेंगी।”
सकट के दिन, बुढ़िया के बच्चे को आंवां में बिठा दिया गया और बुढ़िया ने सकट माता के सामने बैठकर पूजा आरंभ की। पहले तो आंवा पकने में कई दिन लगते थे, पर इस बार सकट माता की कृपा से एक ही रात में आंवा पक गया। इससे सभी चौक गए और उन्होंने माता सकट की महिमा को स्वीकार कर लिया। तब से आज तक सकट माता की पूजा और व्रत का विधान चला आ रहा है।
सकट चौथ व्रत की पूजा विधि
सकट चौथ व्रत की पूजा विधि को सुरक्षित रूप से आचार्य निर्णय के साथ अनुसरण करना चाहिए। यहां कुछ महत्वपूर्ण चरण हैं:
पूजा की शुरुआत: स्नान एवं संकल्प
- सकट चौथ के दिन, सुबह का समय, स्नान करके गणेश जी की पूजा का संकल्प लें।
- इस दिन फलाहार ही करें।
पूजा विधि: भगवान गणेश की कथा
- संध्याकाल में भगवान गणेश की कथा पढ़ें और उन्हें तिल के लड्डू और पीले पुष्पों के साथ अर्पित करें।
- भगवान गणेश को दूर्वा भी अर्पित करें।
- चन्द्रमा को अर्घ्य दें।
सकट चौथ के दिन करें श्री गणेश की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
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सकट चौथ व्रत का आयोजन समर्पितता और भक्ति भावना के साथ किया जाता है। यह व्रत गणेश भगवान की कृपा को प्राप्त करने का अद्वितीय उपाय है और समृद्धि एवं सुख भरा जीवन प्रदान करता है।