Dashrath Krit Shani Stotra

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शनिवार का दिन हिन्दू धर्म में न्याय के देवता शनि देव को समर्पित है, और इस दिन को विशेष रूप से पूजा-अर्चना किया जाता है। शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें शनिदेव की कृपा और आशीर्वाद का मार्गदर्शन होता है जो व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्ति प्रदान करता है। इसके अलावा, शनि स्त्रोत का पाठ करने से व्यक्ति के करियर और कारोबार में सफलता मिलती है।

शनिदेव की पूजा-अर्चना का महत्व

शनिदेव की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के जीवन में व्याप्त सभी दुख और संकट दूर हो जाते हैं। शनिदेव न्याय के देवता हैं और उनकी कृपा से व्यक्ति को न्याय, समृद्धि, और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। शनिदेव की पूजा करने से कठिनाईयों में सहारा मिलता है और व्यक्ति को अध्यात्मिक दृष्टि से भी लाभ होता है। उनकी आराधना से मन, वचन, और क्रिया सभी में सुधार होता है और व्यक्ति धार्मिकता की दिशा में प्रगट होता है।

दशरथकृत शनि स्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।

नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।

नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।

नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।

अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।

तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्घविद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।

प्रसाद कुरु मे देव वाराहोऽहमुपागत।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

दशरथ कृत शनि स्त्रोत: मन्त्रों का महत्व

दशरथ कृत शनि स्त्रोत एक शक्तिशाली मंत्र है जो शनिदेव की कृपा को प्राप्त करने में सहायक है। इसमें शनिदेव की विशेषता और उनकी शक्तियों का वर्णन है जो शिष्य को न्याय, समृद्धि, और सुख-शांति की प्राप्ति में मदद करता है। यह मंत्र शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए पूर्वकृत साधना को समर्थन करता है और उनके आशीर्वाद से व्यक्ति का जीवन सफलतापूर्ण बनता है।

दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ कैसे करें

शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करने से पहले, व्यक्ति को शुद्धि बनाए रखना चाहिए। इसके बाद, एक शांत, साकार, और पवित्र जगह पर बैठकर मन्त्रों का जप करना चाहिए। मन्त्रों को ध्यान से सुनना और उनका अर्थ समझना भी महत्वपूर्ण है। इस प्रकार का पाठ करने से शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्यक्ति का जीवन समृद्धि से भरा रहता है।

शनि स्तोत्र का महत्व:

  1. सभी संकटों से मुक्ति: शनिवार के दिन इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। शनिदेव की कृपा से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
  2. करियर और कारोबार में सफलता: शनि स्तोत्र का पाठ करने से करियर और कारोबार में सफलता प्राप्त होती है। शनिदेव व्यापारिक सुविधाओं और उत्तम नौकरी में वृद्धि करने के लिए जाने जाते हैं।
  3. साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव को कम करता है: शनि स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति को साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव में कमी होती है। शनिदेव के क्रोध को शांत करते हुए जीवन को सुखमय बनाता है।

दशरथ कृत शनि स्तोत्र: विशेषताएँ और फायदे

1. प्रसन्नता की प्राप्ति:

दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से सौर देवता प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

2. सभी पापों से मुक्ति:

इस स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति के सभी पाप धूप होते हैं और उसे पवित्रता मिलती है।

3. कठिनाईयों का समापन:

जीवन में आने वाली कठिनाईयों को शनि स्तोत्र के पाठ से समाप्त किया जा सकता है, और व्यक्ति का मार्ग साफ हो जाता है।

4. शांति और सुख:

यह स्तोत्र व्यक्ति को शांति और सुख प्रदान करता है, उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है।

5. आर्थिक समृद्धि:

शनि स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि मिलती है और वह धन की कमी से मुक्त होता है।

6. सफल जीवन:

शनि स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति का जीवन सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचता है, और उसे आत्मविश्वास और उत्साह मिलता है।

7. रोग निवारण:

यह स्तोत्र व्यक्ति को रोगों से मुक्ति प्रदान करता है और उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखता है।

8. उच्च उद्दीपन:

शनि स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति का उद्दीपन उच्च होता है, और उसमें ज्ञान और बुद्धि की वृद्धि होती है।

9. परिवारिक सुख:

शनि स्तोत्र के पाठ से परिवार के सभी सदस्यों को सुख-शांति और आपसी समरसता मिलती है।

शनिदेव का आशीर्वाद: फलों के साथ सफलता

शनिदेव की पूजा-अर्चना का पालन करने से व्यक्ति को शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके करुणा से व्यक्ति का जीवन सफलता से भरा रहता है। शनिवार के दिन दशरथ कृत शनि स्त्रोत का पाठ करने से व्यक्ति को न्याय, समृद्धि, और आनंद की प्राप्ति होती है। यह न केवल शारीरिक बल से युक्त करता है बल्कि उसके मानसिक स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित करता है। इससे व्यक्ति का करियर और कारोबार में भी समृद्धि होती है और उसका जीवन सुखमय बनता है।

समापन: शनि स्त्रोत से प्राप्त आशीर्वाद

शनिदेव की आराधना और उनके शनि स्त्रोत का पाठ करना व्यक्ति को दुर्भाग्य से मुक्ति दिलाता है और उसे आनंद, शांति, और सुख से भरा जीवन प्रदान करता है। शनिवार के दिन इस स्त्रोत का पाठ करके व्यक्ति शनिदेव की कृपा को आमंत्रित करता है और उसके आशीर्वाद से उसका जीवन सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचता है।

इस पूरी प्रक्रिया को अनुष्ठान करके व्यक्ति शनिदेव के आशीर्वाद को प्राप्त करता है और उसका जीवन खुशियों से भरा रहता है। इससे व्यक्ति को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सहारा मिलता है और उसे अपने कार्यों में सफलता हासिल होती है।

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